देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यू.पी.ई.एस बिधौली में आयोजित उत्तराखंड न्यायाधीश संघ के वार्षिक सम्मेलन “जूडिशियम 2.0 : इंक्लूज़न, एक्सेस एंड स्ट्रेंथनिंग” में भाग लिया और कहा कि न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाना सुशासन की मूल भावना है। उन्होंने बताया कि त्वरित एवं निष्पक्ष न्याय हर समाज वर्ग तक पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
सम्मेलन की थीम, समावेशिता, न्याय तक आसान पहुंच और न्यायिक संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण, विकसित भारत के निर्माण के संकल्प से जुड़ी हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय व्यवस्था में समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर और सम्मान मिलना चाहिए तथा भौगोलिक या आर्थिक बाधाएँ न्याय तक पहुंच में रोड़ा नहीं बननी चाहिए। विशेष रूप से उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में दूरदराज के इलाकों तक सरल और सुलभ न्याय सुनिश्चित करना आवश्यक है। न्याय की सार्थकता उसकी निष्पक्षता और समयबद्धता में निहित है, इसलिए न्यायिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक विलंब से जनता का विश्वास प्रभावित होता है। इसीलिए न्यायिक प्रक्रियाओं को और अधिक प्रभावी तथा समयबद्ध बनाने के लिए सतत प्रयास आवश्यक हैं।
न्यायपालिका लोकतंत्र का मजबूत स्तंभ है और कानून के शासन की सफलता जनता के विश्वास पर निर्भर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि माननीय न्यायाधीश इस दायित्व का सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में न्यायिक व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाने के कई कदम उठाए गए हैं। भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम जैसे नए कानूनों के साथ-साथ ई-कोर्ट्स, नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड, डिजिटल केस मैनेजमेंट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी व्यवस्थाओं ने न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाया है।
राज्य सरकार भी न्यायालयों के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने, डिजिटल कोर्ट, ई-फाइलिंग और वर्चुअल सुनवाई जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है।साथ ही राजस्व लोक अदालतों के माध्यम से वर्षों से लंबित मामलों का त्वरन्त एवं सौहार्दपूर्ण समाधान किया जा रहा है। कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के बारे में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने नकल विरोधी कानून, अवैध धर्मांतरण निरोधक क़ानून, दंगा रोधी कानून तथा भ्रष्टाचार व अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई का उल्लेख किया और कहा कि इन प्रयासों से उत्तराखंड में कानून के राज को मजबूती मिली है।
महिला सशक्तिकरण तथा समान न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य में लागू समान नागरिक संहिता को एक ऐतिहासिक कदम बताया गया, जिसका देशभर में उल्लेख हो रहा है। सम्मेलन “जूडिशियम 2.0” को न्याय व्यवस्था को और अधिक समावेशी, सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण बताया गया और कहा गया कि यह विकसित एवं श्रेष्ठ उत्तराखंड के निर्माण के संकल्प को साकार करने में सहायक होगा। इस अवसर पर उत्तराखण्ड जज एसोसिएशन की कल्याण निधि के लिए 5 करोड़ रुपये की घोषणा की गई तथा एसोशिएशन की स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
