सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति ने देहरादून में की बैठक, दिए विस्तृत निर्देश। 

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उत्तराखंड राज्य में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के अध्यक्ष अभय मनोहर सप्रे (सेवानिवृत्त न्यायाधीश) ने सोमवार को मुख्य सचिव, उत्तराखण्ड शासन, अन्य हितधारक विभागों के अधिकारियों एवं सभी जिलाधिकारियों के साथ सड़क सुरक्षा के संबंध में किये जा रहे कार्यों की समीक्षा की गई। उत्तराखण्ड राज्य में साल 2026 में माह अगस्त तक 1480 सड़क दुर्घटनाओं में 884 व्यक्तियों की मृत्यु हुई एवं 1626 व्यक्ति घायल हुए।

जिलावार दुर्घटनाओं में देहरादून, उधमसिंहनगर, हरिद्वार एवं नैनीताल जनपदों में सर्वाधिक दुर्घटनाएं घटित हुई। इन जनपदों में क्रमशः 131, 229, 213 एवं 104 व्यक्तियों की मृत्यु हुई जबकि 322, 338, 279 एवं 334 व्यक्ति घायल हुए। यह भी देखा गया कि शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में होने वाली दुर्घटनाओं में जनहानि अधिक है। बैठक के दौरान अध्यक्ष ने बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर नियन्त्रण करने और दुर्घटना में होने वाली जनहानि को कम करने के संबंध में विस्तृत निर्देश दिये गये।

 

सुप्रीम कोर्ट कमेटी के बैठक के दौरान दिए विस्तृत दिशा निर्देश…….

1. राज्य में प्रत्येक जनपद को “शून्य मृत्यु दर वाला जिला” (Zero Fatality District) के रूप में चिन्हित करते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार के मानकों के अनुसार कार्यवाही की जाए।

2. पीएम राहत योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए, क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से किया जाए।

3. राज्य के समस्त सरकारी कर्मचारियों, सरकारी संस्थानों के अन्तर्गत कार्यरत कार्मिकों को मोटरयान कानूनों के अनुपालन हेतु प्रोत्साहित किया जाए। विशेष रूप से No Helmet-No Entry, No Entry for without Driving Licence, No Entry for without Insaurance संबंधी व्यवस्था को लागू किया जाए।

4. इसी प्रकार शिक्षा विभाग के अन्तर्गत संचालित स्कूलों, कॉलेजों, कोचिंग सेन्टर में अध्ययनरत् छात्रों के लिए भी उपरोक्तानुसार व्यवस्था लागू कराई जाए।

5. चालक लाईसेन्स जारी करने से पूर्व चालकों की परीक्षा कम्प्यूटराइज्ड आधार पर लिए जाने हेतु सभी परिवहन कार्यालयों में ऑटोमेटेड ड्राईविंग टेस्ट ट्रैक की स्थापना यथाशीघ्र पूर्ण की जाए।

6. देहरादून एवं हरिद्वार में निर्माणाधीन चिल्ड्रन ट्रैफिक पार्क में दुपहिया एवं चार पहिया वाहनों संबंधी सिमुलेटर की स्थापना सी०एस०आर० के अन्तर्गत किये जाने हेतु वाहन निर्माता कम्पनियों यथा- मारूति, होण्डा आदि का सहयोग प्राप्त किया जाए।

7. चारधाम यात्रा मार्गों पर वाहनों की निगरानी एवं मोटरयान कानूनों का उल्लंघन करने वाले चालकों के विरूद्ध कार्यवाही हेतु ए०एन०पी०आर० कैमरों की स्थापना की जाए। इसके अतिरिक्त वर्तमान में स्थापित ए०एन०पी०आर० कैमरों के द्वारा वर्तमान चिन्हित ट्रैफिक वाईलेशन में अन्य अभियोगों को भी सम्मिलित किया जाए।

8. चारधाम यात्रा मार्गों पर सी०एस०आर० के अन्तर्गत ट्रामा सेन्टर एवं चालक विश्राम गृह की स्थापना / निर्माण की संभावना का परीक्षण कर लिया जाए और तद्‌नुसार आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

9. पॉट होल्स के कारण होने वाली दुर्घटनाओं पर नियन्त्रण हेतु सुधारीकरण की कार्यवाही समयबद्ध रूप से की जाए और इस हेतु संबंधित हितधारक की जिम्मेदारी निर्धारित की जाए।

10. जिला सड़क सुरक्षा समितियों की बैठक प्रतिमाह अनिवार्य रूप से आहूत करते हुए उसमें लिए गये निर्णयों के अनुसार कार्यवाही की जाए और कृत कार्यवाही का विवरण मोर्थ पोर्टल पर अपलोड किए जाए।

11. जनपदों में घटित होने वाली प्रत्येक दुर्घटना का सघनता से विश्लेषण किया जाए, जिसके अन्तर्गत दुर्घटना घटित होने का कारण, उसमें होने वाली मृत्यु का कारण, भविष्य में उक्त प्रकार की दुर्घटना रोकने के उपाय और उक्त उपायों का समय पर क्रियान्वयन किया जाए।

12. दुर्घटना की रोकथाम हेतु 4E (Engineering, Enforcement, Education, Emergency care) महत्वपूर्ण है, और दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु उक्त चारों अवयवों के मध्य समन्वय अत्यन्त महत्वपूर्ण है, अतः सभी विभागों द्वारा समन्वय स्थापित करते हुए दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु कार्यवाही की जाए।

13. मा० उच्चतम् न्यायालय द्वारा पैदल यात्रियों की सुरक्षा हेतु हाल ही में निर्देश दिये गये है, उक्त निर्देशों के अनुपालन में नियमावली / एस०ओ०पी० समयबद्ध रूप में बनायी जाए और उसकी आख्या सुप्रीम कोर्ट कमेटी को प्रेषित की जाए।

14. सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु केवल प्रवर्तन कार्यवाही ही पर्याप्त नहीं है, अपितु सामान्य जनमानस के मध्य जनजागरूकता भी अत्यन्त आवश्यक है। अतः जागरूकता कार्यक्रमों को केवल स्कूलों / कॉलेजों तक सीमित न रखकर प्रत्येक आयु वर्ग के लोगों को इससे जोड़ा जाए।

15. पर्वतीय क्षेत्रों में होने वाली दुर्घटनाओं की स्थिति में वाहन को गहरी खाई/ खड्ड में गिरने से बचाने के लिए सभी मार्गों पर क्रैश बैरियर की स्थापना अनिवार्य है। अतः राज्य में अवशेष मार्गों पर क्रैश बैरियर की स्थापना हेतु समय-सीमा निर्धारित करते हुए कार्यवाही की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि स्थापित किये जाने वाले क्रैश बैरियर आई०आर०सी० मानकों के अनुरूप हों।

16. गोल्डन ऑवर में दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दृष्टि से घायल व्यक्ति तक मेडिकल सुविधा की पहुच संबंधी रेस्पोन्स टाईम में सुधार किया जाए।

17. आवारा पशुओं के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु राज्य सरकार द्वारा नीति बनायी जाए।